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    उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा परिषद स्वागत है »

    देववाणी मातृ भाषा संस्‍कृत शिक्षा के प्रचार प्रसार हेतु उत्तराखण्‍ड राज्य ने संस्‍कृत शिक्षा निदेशालय संस्‍कृत शिक्षा परिषद संस्‍कृत अकादमी एंव संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय का गठन किया है ।संस्‍कृत भाषा विश्‍व की समस्‍त भाषाओं की प्राचीन भाषा है इस भाषा में उच्‍च कोटि के साहित्‍य सम्मिलित है संस्‍कृत भाषा भारतीय आर्य भाषाओं की जननी बन कर बहुभाषी भारतीयों को एक सूत्र में बांधने का वातावरण सृजित करती है इसके अलावा भारतीय भाषाओं में भी इस भाषा के शब्द अत्यधिक प्राप्‍त होते है । विश्‍व के प्राचीन ग्रन्थ चारों वेद इसी भाषा में बनाये गये है इससे इस भाषा का महत्व आज भी सर्वोपरि है ।संस्‍कृत साहित्य का अध्‍ययन से सद् विचार स्‍वयं में उत्पन्न होते है यह भाषा धर्म प्राण भाषा है इसी से धर्म की विस्‍तृत व्याख्‍या की जाती है । उत्तराखण्‍ड राज्य में संस्‍कृत को द्वितीय राज भाषा का दर्जाप्राप्‍त हुआ है । राज्‍य में परम्‍परागत रूप से संस्‍कृत शिक्षा वाले 90 विद्यालय/महाविद्यालय संचालित है जिन में प्रथमा (कक्षा 06 से कक्षा 08) से लेकर आर्चाय पर्यन्‍त की कक्षायें संचालित की जा रही है । इन विद्यालयों हेतु एक उपयुक्त संस्‍कृत शिक्षा की पाठ्यचर्या की आवश्‍यकता काफी समय पूर्व से ही हो रही है । उत्तराखण्‍ड में संस्‍कृत शिक्षा निदेशालय एवं संस्‍कृत शिक्षा परिषद की स्थापना की गयी है, जिनका उद्देश्‍य संस्‍कृत शिक्षा को दिन प्रतिदिन बढ़ाने के लिये उसका सम्बर्धन एवं नियोजन को पूरा करना है ।

    देववाणी मातृ भाषा संस्‍कृत शिक्षाया: प्रचार प्रसाराय: उत्तराखण्‍ड राज्ये संस्‍कृत शिक्षा निदेशालय: संस्‍कृत शिक्षा परिषद्: संस्‍कृत अकादम्या एंव संस्‍कृत विश्‍वविद्यालयस्य गठनं अभवत् । संस्‍कृत भाषा विश्‍वस्य सर्वासु भाषासु प्राचीनतमा, सर्वोत्कृष्‍ट साहित्य समन्विता चास्ति । संस्‍कृत-भाषा सर्वेसां भारती यान आर्य भाषाणाम् जननी माता । अन्‍यातु भरतीयासु भाषा अपि अस्‍या: शब्‍दा प्राचुर्येणं कृश्‍यन्ते । विश्‍वस्‍य प्राचीनतमा: ग्रन्‍था: चत्‍वारों वेदा: अस्‍थामेव भाषया: सन्ति । येषां महत्‍वमद्यापि सर्वोपरि विधते । संस्‍कृत साहित्‍यस्‍याध्‍ययनेन सद् विचारा: स्‍वयमेप उत्‍पद्यन्‍ते भाषये धर्मप्राणाअस्‍या विस्‍तृता व्‍याख्‍या कृतास्ति । उत्तराखण्‍ड राज्ये संस्‍कृतम् द्वितीय राजभाषायां अगीकृता: जात:अस्मिन् प्रदेश संस्‍कृतस्‍य पराम्‍परागत रूपेण संस्‍कृत शिक्षणार्थ नवति (90) विद्यालय च महाविद्यालय सन्ति । अतैव प्रथमात: (कक्षा पष्‍ठत: कक्षा अष्‍ठ्म) आर्चाय पर्यन्‍त कक्षायान् सम्‍यक एवं विधिवत् रूपेण संचालिता: । एतास्मिन् विद्यालया: हेतु संस्‍कृत शिक्षण: पाठ्यचर्या महत्‍वस्‍य अत्‍याधिक आवश्‍यकोस्ति । एतद् विषये गंभीर चिन्‍तनं मननं एवं त्‍वरित कार्यस्‍य नितांत आवश्‍यकता वर्तते । सम्‍प्रति उत्तराखण्‍डे संस्‍कृत शिक्षा निदेशालय: एवं संस्‍कृत शिक्षा परिषद्स्य गठनं अभ्‍वत् । एतस्मिन् उदेदश्‍यानि संस्‍कृत शिक्षायां दिन प्रतिदिन वर्धने संवर्द्धन एवं नियोजन कार्याणि संम्‍पादितानि अस्ति ।